कुरान - 43:5 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
أَفَنَضۡرِبُ عَنكُمُ ٱلذِّكۡرَ صَفۡحًا أَن كُنتُمۡ قَوۡمٗا مُّسۡرِفِينَ

Transliteration: (Afa nadribu 'ankumuz Zikra safhan an kuntum qawman musrifeen)

तो क्या हम तुमसे इस नसीहत (क़ुरआन) को हटा लें [5] इस वजह से कि तुम हद से गुज़रने वाली [6] क़ौम हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 5

"तो क्या हम तुमसे इस नसीहत (क़ुरआन) को हटा लें [5] इस वजह से कि तुम हद से गुज़रने वाली [6] क़ौम हो?"

[5] नाफ़रमानी के बावजूद मुसलसल रहमत

यह आयत अल्लाह तआला की बेपायां रहमत और सब्र को बयान करती है। मुनकिरीन की मुसलसल सरकशी, मज़ाक़ और हद से गुज़रने के बावजूद, अल्लाह तआला ने क़ुरआन के नुज़ूल को रोक नहीं दिया।

यह इस हक़ीक़त को उजागर करता है कि इलाही हिदायत इंसानी नाफ़रमानियों से मन्सूख़ नहीं होती। अल्लाह की रहमत इंसानी कुफ़्र व शिर्क पर ग़ालिब रहती है, और वह बंदों को सुधरने और तौबा करने के भरपूर मौक़े अता फ़रमाता रहता है।

[6] हद से तजावुज़ करने वाले

"हद से गुज़रने वाले लोग" से मुराद वे काफ़िर और मुशरिक हैं जो कुफ़्र, शिर्क और हक़ की मुख़ालिफ़त में इंतिहा तक पहुंच चुके थे। अपनी इन संगीन बद-आमालियों के बावजूद, अल्लाह ने उन पर हुज्जत पूरी फ़रमाने के लिए नसीहत का सिलसिला जारी रखा।

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