Transliteration: (Wa lammaa jaaa'a 'Eesaa bilbaiyinaati qaala qad ji'tukum bil Hikmati wa li-ubaiyina lakum ba'dal lazee takhtalifoona feehi fattaqul laaha wa atee'oon)
"और जब ईसा रौशन निशानियां लेकर आए, तो उन्होंने कहा: 'बेशक मैं तुम्हारे पास हिकमत लेकर आया हूं [110], और ताकि मैं तुम्हारे लिए बाज़ उन बातों को साफ़ खोल दूं जिनमें तुम इख़्तिलाफ़ करते हो [111]; तो अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो [112]।'"
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से फ़रमाया कि अल्लाह ने उन्हें नबुव्वत, हिकमत और इंजील मुक़द्दस से नवाज़ा है ताकि वे इंसानों को हिदायत की राह दिखाएं।
यहूदी जिन शरई अहकाम में इख़्तिलाफ़ और तहरीफ़ कर चुके थे, हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने हक़ को वाज़ेह फ़रमाकर उनके इख़्तिलाफ़ात को ख़त्म फ़रमाया।
उन्होंने अपनी क़ौम को अल्लाह के तक़वे और अपनी इताअत की दावत दी, जिससे साबित हुआ कि अल्लाह की इताअत नबी की इताअत के बग़ैर मुम्किन नहीं।
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