कुरान - 43:63 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
وَلَمَّا جَآءَ عِيسَىٰ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ قَالَ قَدۡ جِئۡتُكُم بِٱلۡحِكۡمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعۡضَ ٱلَّذِي تَخۡتَلِفُونَ فِيهِۖ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

Transliteration: (Wa lammaa jaaa'a 'Eesaa bilbaiyinaati qaala qad ji'tukum bil Hikmati wa li-ubaiyina lakum ba'dal lazee takhtalifoona feehi fattaqul laaha wa atee'oon)

और जब ईसा रौशन निशानियां लेकर आए, तो उन्होंने कहा: 'बेशक मैं तुम्हारे पास हिकमत लेकर आया हूं [110], और ताकि मैं तुम्हारे लिए बाज़ उन बातों को साफ़ खोल दूं जिनमें तुम इख़्तिलाफ़ करते हो [111]; तो अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो [112]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 63

"और जब ईसा रौशन निशानियां लेकर आए, तो उन्होंने कहा: 'बेशक मैं तुम्हारे पास हिकमत लेकर आया हूं [110], और ताकि मैं तुम्हारे लिए बाज़ उन बातों को साफ़ खोल दूं जिनमें तुम इख़्तिलाफ़ करते हो [111]; तो अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो [112]।'"

[110] हिकमत और इंजील का अता होना

हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से फ़रमाया कि अल्लाह ने उन्हें नबुव्वत, हिकमत और इंजील मुक़द्दस से नवाज़ा है ताकि वे इंसानों को हिदायत की राह दिखाएं।

[111] इख़्तिलाफ़ात का फ़ैसला

यहूदी जिन शरई अहकाम में इख़्तिलाफ़ और तहरीफ़ कर चुके थे, हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने हक़ को वाज़ेह फ़रमाकर उनके इख़्तिलाफ़ात को ख़त्म फ़रमाया।

[112] तक़वा और नबी की इताअत का हुक्म

उन्होंने अपनी क़ौम को अल्लाह के तक़वे और अपनी इताअत की दावत दी, जिससे साबित हुआ कि अल्लाह की इताअत नबी की इताअत के बग़ैर मुम्किन नहीं।

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