कुरान - 43:66 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
هَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّا ٱلسَّاعَةَ أَن تَأۡتِيَهُم بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Hal yanzuroona illas Saa'ata an ta'tiyahum baghtatanw wa hum laa yash'uroon)

वे तो बस क़यामत ही का इंतिज़ार कर रहे हैं कि वह अचानक उन पर आ पड़े और उन्हें ख़बर भी न हो [117]! [118] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 66

"वे तो बस क़यामत ही का इंतिज़ार कर रहे हैं कि वह अचानक उन पर आ पड़े और उन्हें ख़बर भी न हो [117]! [118]"

[117] क़यामत का अचानक आना

काफ़िर ग़फ़लत में डूबे हुए हैं और उन्हें अहसास नहीं कि क़यामत निहायत अचानक आएगी जब लोग अपने दुनियावी बाज़ारों और कामों में मसरूफ़ होंगे और उन्हें संभलने का एक लम्हा भी नहीं मिलेगा।

[118] ग़फ़लत की तबाही

जब क़यामत अचानक आएगी तो उनके होश उड़ जाएंगे और तौबा का दरवाज़ा बंद हो चुका होगा।

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