कुरान - 43:68 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
يَٰعِبَادِ لَا خَوۡفٌ عَلَيۡكُمُ ٱلۡيَوۡمَ وَلَآ أَنتُمۡ تَحۡزَنُونَ

Transliteration: (Yaa 'ibaadi laa khawfun 'alaikumul Yawma wa laaa antum tahzanoon)

(उनसे फ़रमाया जाएगा:) 'ऐ मेरे बंदो! आज के दिन न तुम पर कोई ख़ौफ़ है और न तुम ग़मगीन होगे [121]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 68

"(उनसे फ़रमाया जाएगा:) 'ऐ मेरे बंदो! आज के दिन न तुम पर कोई ख़ौफ़ है और न तुम ग़मगीन होगे [121];"

[121] अहले-ईमान के लिए अमान और बशारत

क़यामत की हौलनाकियों के दिन अल्लाह तआला अपने मुक़र्रब और नेक बंदों को अपनी ख़ास हिफ़ाज़त और रहमत में महफ़ूज़ फ़रमाएगा। उन्हें न आने वाले मुस्तक़बिल का कोई ख़ौफ़ होगा और न पीछे छूटी दुनिया का कोई रंज।

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