कुरान - 43:70 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
ٱدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ أَنتُمۡ وَأَزۡوَٰجُكُمۡ تُحۡبَرُونَ

Transliteration: (Udkhulul Jannata antum wa azwaajukum tuhbaroon)

दाख़िल हो जाओ जन्नत में, तुम और तुम्हारी बीवियां [122], ख़ुशी और इज़्ज़त के साथ [123]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 70

"दाख़िल हो जाओ जन्नत में, तुम और तुम्हारी बीवियां [122], ख़ुशी और इज़्ज़त के साथ [123]!'"

[122] नेक बीवियों के साथ जन्नत में दाख़िला

यहाँ दुनियावी नेक बीवियों की तरफ़ इशारा है जो ईमान की हालत में अपने शौहरों के निकाह में दुनिया से गईं। हूरें तो पहले ही जन्नत में मौजूद हैं। काफ़िर औरत मोमिन शौहर के साथ जन्नत में नहीं जा सकेगी। और अगर किसी मोमिन औरत ने कई शादियां की हों तो वह अपने आख़िरी शौहर के साथ होगी। यही वजह है कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की अज़वाज-ए-मुतह्हरात से किसी दूसरे का निकाह हमेशा के लिए हराम फ़रमाया गया, क्योंकि वे जन्नत में भी हुज़ूर ﷺ ही की अज़वाज रहेंगी।

[123] पुर-मसर्रत और बा-वक़ार इस्तक़बाल

मोमिनीन का जन्नत में दाख़िला निहायत इज़्ज़त, तकरीम और ख़ुशी के साथ होगा और उनके चेहरे नूर व मसर्रत से चमक रहे होंगे।

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