कुरान - 43:71 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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Transliteration: (Yutaafu 'alaihim bisihaa fim min zahabinw wa akwaab, wa feehaa maatashtaheehil anfusu wa talazzul a'yunu wa antum feehaa khaalidoon)

उनके सामने सोने की रकाबियों (थालों) और प्यालों के दौर चलाए जाएंगे [124], और उसमें वह सब कुछ होगा जो दिलों को भाए [125] और जिससे आँखें लज़्ज़त पाएं [126], और तुम उसमें हमेशा रहोगे [127]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 71

"उनके सामने सोने की रकाबियों (थालों) और प्यालों के दौर चलाए जाएंगे [124], और उसमें वह सब कुछ होगा जो दिलों को भाए [125] और जिससे आँखें लज़्ज़त पाएं [126], और तुम उसमें हमेशा रहोगे [127]!"

[124] जन्नत की ख़िदमत और सोने के बर्तन

जन्नत में ख़िदमतगार ग़िल्मान सोने के थालों और नफ़ीस प्यालों में पाकीज़ा नेमतें और मसरूर-कुन मशरूबात लेकर जन्नतियों के हल्क़ों के दरमियान चक्कर लगाएंगे।

[125] जन्नतियों की पाकीज़ा ख़्वाहिशात

जन्नत में इंसान का दिल सिर्फ़ पाकीज़ा और आला चीज़ों की ख़्वाहिश करेगा, और जो भी तमन्ना दिल में आएगी वह फ़ौरन पूरी हो जाएगी।

[126] आँखों की ठंडक और दीदार-ए-इलाही

जन्नत के दिलकश बाग़ात, नहरें, हूरें, और सबसे बढ़कर हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ियारत और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का दीदार-ए-पाक—जो तमाम नेमतों से अफ़ज़ल और आला तरीन नेमत है।

[127] अबदी ज़िंदगी बग़ैर किसी ज़वाल के

दुनिया की नेमतें फ़ानी हैं, लेकिन जन्नत की हर नेमत और ज़िंदगी हमेशा-हमेशा के लिए होगी; वहाँ न मौत होगी और न बुढ़ापा।

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