Transliteration: (Al akhillaaa'u Yawma'izin ba'duhum liba'din 'aduwwun illal muttaqeen (section 6))
"उस दिन गहरे दोस्त भी एक दूसरे के दुश्मन बन जाएंगे [119], सिवाए परहेज़गारों (मुत्तक़ीन) के [120]!"
दुनिया में जो लोग गुनाह, कुफ़्र और फ़िसक़ व फ़ुजूर पर एक दूसरे के यार-दोस्त बने हुए थे, क़यामत के दिन वे एक दूसरे पर लानत भेजेंगे और कहेंगे कि इसी ने मुझे भटकाया था। हर बातिल दोस्ती उस दिन सख़्त दुश्मनी बन जाएगी।
इसके बरअक्स, जिन नेक बंदों की दोस्ती अल्लाह के लिए थी, उनकी दोस्ती आख़िरत में और ज़्यादा मज़बूत होगी। वे एक दूसरे की शफ़ाअत करेंगे और जन्नत में हमेशा साथ रहेंगे।
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