Transliteration: (Fa izaa massal insaana durrun da'aanaa summa izaa khawwalnaahu ni'matam minna qaala innamaaa ootee tuhoo 'alaa 'ilm; bal hiya fitna tunw wa laakinna aksarahum laa ya'lamoon)
"तो जब इंसान को कोई तकलीफ़ पहà¥à¤à¤šà¤¤à¥€ है तो वह हमें पà¥à¤•ारता है [123]; फिर जब हम उसे अपनी तरफ़ से कोई नेमत अता फ़रमाते हैं, तो कहता है: 'यह तो मà¥à¤à¥‡ अपने इलà¥à¤® (हà¥à¤¨à¤°) के ज़ोर पर मिला है [124]', बलà¥à¤•ि यह तो à¤à¤• आज़माइश है, लेकिन उनमें से अकà¥à¤¸à¤° नहीं जानते [125] ।"
यहाठ'इंसान' से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ नाशà¥à¤•à¥à¤°à¤¾ काफ़िर या ग़ाफ़िल इंसान है। जब कोई बीमारी, फ़क़à¥à¤° या तंगी आती है तो वह गिड़गिड़ा कर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ को पà¥à¤•ारता है और अपने बà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ल जाता है।
मगर जैसे ही अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उस पर अपनी नेमत व दौलत का दरवाज़ा खोलता है, तो वह अपनी पिछली बेबसी à¤à¥‚ल जाता है और क़ारून की तरह घमंड से कहता है कि 'यह तो मेरी अक़à¥à¤², तजà¥à¤°à¥à¤¬à¥‡ और हà¥à¤¨à¤° का नतीजा है।' वह नेमत को अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का फ़ज़à¥à¤² मानने से इनकार कर देता है।
हक़ीक़त यह है कि दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दौलत और राहत इंसान के लिठà¤à¤• इमà¥à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¨ और आज़माइश है कि वह शà¥à¤•à¥à¤°à¤—à¥à¤œà¤¼à¤¾à¤°à¥€ करता है या नाशà¥à¥à¤•à¥à¤°à¥€ व तकबà¥à¤¬à¥à¤° में मà¥à¤¬à¥à¤¤à¤²à¤¾ होता है। मगर अकà¥à¤¸à¤° नादान इस राज़ को नहीं समà¤à¤¤à¥‡à¥¤
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