कुरान - 39:51 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
فَأَصَابَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْۚ وَٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡ هَـٰٓؤُلَآءِ سَيُصِيبُهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْ وَمَا هُم بِمُعۡجِزِينَ

Transliteration: (Fa asaabahum saiyi aatu maa kasaboo; wallazeena zalamoo min haaa'ulaaa'i sa yuseebuhum saiyi aatu maa kasaboo wa maa hum bimu'jizeen)

तो उनकी कमाई हुई बुराइयां उन पर आ पड़ीं [128], और इनमें से जो ज़ालिम हैं [129] उन पर भी अनक़रीब उनकी कमाई की बुराइयां आ पड़ेंगी और वे (अल्लाह को) आजिज़ नहीं कर सकते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 51

"तो उनकी कमाई हुई बुराइयां उन पर आ पड़ीं [128], और इनमें से जो ज़ालिम हैं [129] उन पर भी अनक़रीब उनकी कमाई की बुराइयां आ पड़ेंगी और वे (अल्लाह को) आजिज़ नहीं कर सकते।"

[128] नाफ़रमानी की कमाई का वबाल

काफ़िरों और मुशरिकों का माल व दौलत उनके गुनाहों, तकब्बुर और सरकशी का ज़रिया बन गया था। बिलआख़िर उनके बुरे आमाल का वबाल और अज़ाब उन पर मुसल्लत हुआ और वे हलाक कर दिए गए। इसके बरअक्स मोमिन का माल इबादत, सदक़ा और ख़ैरात के दरवाज़े खोलता है।

[129] मक्का के मुशरिकों को तंबीह

यहाँ 'इनमें से जो ज़ालिम हैं' से मुराद हुज़ूर ﷺ के ज़माने के अहले मक्का और मुशरिक हैं। उन्हें ख़बरदार किया गया कि जो सुलूक पिछली नाफ़रमान क़ौमों के साथ हुआ, वही तुम्हारा भी मुक़द्दर बनेगा और तुम अल्लाह की पकड़ से कभी भाग न सकोगे।

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