कुरान - 39:50 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
قَدۡ قَالَهَا ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Qad qaalahal lazeena min qablihim famaaa aghnaa 'anhum maa kaanoo yaksiboon)

यही बात उन लोगों ने भी कही थी जो इनसे पहले थे [126], तो उनकी कमाई उनके कुछ काम न आई [127] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 50

"यही बात उन लोगों ने भी कही थी जो इनसे पहले थे [126], तो उनकी कमाई उनके कुछ काम न आई [127] ।"

[126] पिछली सरकश क़ौमों और क़ारून का अंजाम

पिछली नाफ़रमान क़ौमों—जैसे क़ौम-ए-आद, समूद, फ़िरऔन और बिलख़ुसूस क़ारून—ने भी यही घमंड दिखाया था और कहा था कि हमारी दौलत हमारी महारत की वजह से है। उनका अंजाम सबके सामने है कि अल्लाह के अज़ाब ने उन्हें नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया।

[127] माल व दौलत अज़ाब को न टाल सके

जब अल्लाह का क़हर नाज़िल हुआ, तो उनके बड़े-बड़े ख़ज़ाने, महल और फ़ौजें उन्हें तबाह होने से न बचा सकीं। माल वही मुफ़ीद है जो हज़रत उस्मान-ए-ग़नी और हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर रज़ियल्लाहु अन्हुमा की तरह अल्लाह की राह में ख़र्च हो, वरना क़ारून की तरह माल हलाकत का ज़रिया बन जाता है।

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