कुरान - 39:52 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
أَوَلَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Awalam ya'lamooo annal laaha yabsutur rizqa limai yashaaa'u wa yaqdir; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yu'minoon (section 5))

क्या वे नहीं जानते [130] कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ वसीअ (कुशादा) फ़रमा देता है और जिसके लिए चाहता है तंग फ़रमा देता है [131]? बेशक इसमें ईमान वालों के लिए बड़ी निशानियां हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 52

"क्या वे नहीं जानते [130] कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ वसीअ (कुशादा) फ़रमा देता है और जिसके लिए चाहता है तंग फ़रमा देता है [131]? बेशक इसमें ईमान वालों के लिए बड़ी निशानियां हैं।"

[130] रिज़्क़ सिर्फ़ हुनर के ताबे नहीं

यह बात हर इंसान मुशाहिदे से जानता है कि रिज़्क़ का दारोमदार सिर्फ़ ज़हानत या हुनर पर नहीं है। बाज़ औक़ात आला दर्जे के अक़्लमंद और हुनरमंद तंगदस्त रहते हैं और कम समझ वाले दौलतमंद बन जाते हैं। यह इस बात का खुला सबूत है कि रिज़्क़ का इख़्तियार अल्लाह के दस्ते-क़ुदरत में है।

[131] बारिश की तरह रिज़्क़ की तक़सीम

दौलत और तंगदस्ती की मिसाल बारिश की मानिंद है—कहीं बेतहाशा बरसती है और कहीं एक क़तरा भी नहीं गिरता। अल्लाह तआला अपनी हिकमत के मुताबिक़ बंदों को आज़माता है। ईमान वाले इस निज़ाम में अल्लाह की क़ुदरत की निशानियां देखते हैं और हर हाल में साबिर व शाकिर रहते हैं।

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