Transliteration: (Qul yaa'ibaadiyal lazeena asrafoo 'alaaa anfusihim laa taqnatoo mirrahmatil laah; innal laaha yaghfiruz zunooba jamee'aa; innahoo Huwal Ghafoorur Raheem)
"आप फ़रमाइà¤: 'ठमेरे वे बंदो [132] [133] जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी जानों पर ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¤à¥€ की है [134]! अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की रहमत से ना-उमà¥à¤®à¥€à¤¦ न हो [135], बेशक अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ सब गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ को बख़à¥à¤¶ देता है [136]; बेशक वही बहà¥à¤¤ बख़à¥à¤¶à¤¨à¥‡ वाला, निहायत मेहरबान है।'"
इस मà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤• आयत में हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® की ज़बान-à¤-फ़ैज़-तरà¥à¤œà¥à¤®à¤¾à¤¨ से कहलवाया गया: 'ठमेरे बंदो' (या 'इबादी)। इससे साबित हà¥à¤† कि अहले ईमान हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º के ग़à¥à¤²à¤¾à¤® और उमà¥à¤®à¤¤à¥€ हैं, जैसे हदीस व उलमा की तसà¥à¤°à¥€à¤¹à¤¾à¤¤ में 'अबà¥à¤¦à¥à¤¨-नबी' कहलाना जाइज़ और बाइस-à¤-सआदत है।
यह ख़िताब हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® की जानिब से अपनी उमà¥à¤®à¤¤ के उन मोमिनीन को है जो गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ में मà¥à¤¬à¥à¤¤à¤²à¤¾ होकर दिलशिकसà¥à¤¤à¤¾ हो चà¥à¤•े थे। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तसलà¥à¤²à¥€ दी गई कि मायूस न हो, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ नबी रहमतà¥à¤² लिल-आलमीन है।
'जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी जानों पर ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¤à¥€ की' से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¤—ार मोमिनीन हैं। अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की रहमत इतनी वसीअ है कि वह तौबा करने वालों के बड़े से बड़े गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ को à¤à¥€ माफ़ फ़रमा देता है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की रहमत से मायूस होना कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° के क़रीब है। चाहे गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ समंदर के à¤à¤¾à¤— और पहाड़ों जितने कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हों, सिदà¥à¤•़-à¤-दिल से तौबा करने पर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ करीम सब माफ़ फ़रमा देता है।
यह आयत उन लोगों के हक़ में नाज़िल हà¥à¤ˆ जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ज़माना-à¤-जाहिलियत में à¤à¤¾à¤°à¥€ गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ किठथे (जैसे हज़रत वहशी जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हज़रत हमज़ा को शहीद किया था)। जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अरà¥à¤œà¤¼ किया कि कà¥à¤¯à¤¾ इसà¥à¤²à¤¾à¤® लाने पर हमारे पिछले गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ माफ़ हो जाà¤à¤‚गे? तो यह आयत नाज़िल हà¥à¤ˆ जिसने तमाम गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¤—ारों के लिठरहमत का अज़ीम दरवाज़ा खोल दिया।
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