कुरान - 39:55 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
وَٱتَّبِعُوٓاْ أَحۡسَنَ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَكُمُ ٱلۡعَذَابُ بَغۡتَةٗ وَأَنتُمۡ لَا تَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Wattabi'ooo ahsana maaa unzila ilaikum mir Rabbikum min qabli aiyaatiyakumal 'azaabu baghtatanw wa antum laa tash'uroon)

और पैरवी करो उस बेहतरीन कलाम की जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारी तरफ़ नाज़िल किया गया है [140], इससे पहले कि तुम पर अचानक अज़ाब आ पड़े और तुम्हें ख़बर भी न हो [141] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 55

"और पैरवी करो उस बेहतरीन कलाम की जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारी तरफ़ नाज़िल किया गया है [140], इससे पहले कि तुम पर अचानक अज़ाब आ पड़े और तुम्हें ख़बर भी न हो [141] ।"

[140] बेहतरीन कलाम क़ुरआन-ए-मजीद की इत्तिबा

'बेहतरीन चीज़' से मुराद क़ुरआन मजीद है, जिसकी हर आयत और हर हुक्म आला व अफ़ज़ल है। बंदों को हुक्म दिया गया कि वे क़ुरआन के अहकाम पर पूरी निष्ठा और पाबंदी से अमल करें।

[141] अचानक आने वाले अज़ाब व मौत से डराना

मौत और अज़ाब अचानक आते हैं, बिना किसी पूर्व सूचना के। अगर इंसान ग़फ़लत में पड़ा रहा तो अचानक मौत आ दबोचेगी और फिर पछतावे के सिवा कुछ हाथ न आएगा।

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