Transliteration: (An taqoola nafsuny yaahasrataa 'alaa maa farrattu fee jambil laahi wa in kuntu laminas saakhireen)
"कहीं कोई जान यह न कहने लगे: 'हाय अफ़सोस मेरी उस कोताही पर जो मैंने अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के हक़ में की [142], और बेशक मैं तो मज़ाक़ ही उड़ाता रहा [143]!'"
क़ियामत के दिन काफ़िर और ग़ाफ़िल इंसान अपनी बेअमली पर अफ़सोस करेगा कि उसने अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की फ़रमांबरदारी और हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º के अदब व इताअत में सख़à¥à¤¤ कोताही की। रसूल ï·º की नाफ़रमानी दरहक़ीक़त अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ही की नाफ़रमानी है।
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में जो लोग नमाज़, रोज़ा, शरीअत और इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ अहकाम का मज़ाक़ उड़ाते थे और मोमिनीन पर हà¤à¤¸à¤¤à¥‡ थे, वे उस दिन अपनी इस बेहà¥à¤¦à¤¾ हरकत पर ख़ून के आà¤à¤¸à¥‚ रोà¤à¤‚गे।
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