कुरान - 39:58 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
أَوۡ تَقُولَ حِينَ تَرَى ٱلۡعَذَابَ لَوۡ أَنَّ لِي كَرَّةٗ فَأَكُونَ مِنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Aw taqoola heena taral 'azaaba law anna lee karratan fa akoona minal muhsineen)

या अज़ाब देखकर यह न कहे: 'काश कि मुझे एक बार फिर (दुनिया में) पलटना नसीब हो [145], तो मैं नेकोकारों में शामिल हो जाऊँ' । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 58

"या अज़ाब देखकर यह न कहे: 'काश कि मुझे एक बार फिर (दुनिया में) पलटना नसीब हो [145], तो मैं नेकोकारों में शामिल हो जाऊँ' ।"

[145] दुनिया दारुल-अमल है, आख़िरत दारुल-जज़ा

अज़ाब के दहकते अंगारे देखकर काफ़िर तमन्ना करेगा कि काश मुझे दोबारा दुनिया में भेज दिया जाए ताकि मैं नेक अमल कर सकूँ। मगर उस वक़्त यह तमन्ना बिल्कुल बेफ़ायदा होगी क्योंकि अमल की जगह सिर्फ़ दुनिया है, आख़िरत सिर्फ़ हिसाब और सज़ा-ओ-जज़ा का मुक़ाम है।

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