कुरान - 39:60 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ تَرَى ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ عَلَى ٱللَّهِ وُجُوهُهُم مُّسۡوَدَّةٌۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡمُتَكَبِّرِينَ

Transliteration: (Wa Yawmal Qiyaamati taral lazeena kazaboo 'alallaahi wujoohuhum muswaddah; alaisa fee Jahannama maswal lilmutakabbireen)

और क़ियामत के दिन आप उन लोगों को देखेंगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बोला था [148], कि उनके चेहरे काले होंगे [149]; क्या मुतकब्बिरों (घमंडियों) का ठिकाना जहन्नम में नहीं है? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 60

"और क़ियामत के दिन आप उन लोगों को देखेंगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बोला था [148], कि उनके चेहरे काले होंगे [149]; क्या मुतकब्बिरों (घमंडियों) का ठिकाना जहन्नम में नहीं है?"

[148] अल्लाह पर बोहतान बाँधने वाले

जिन्होंने शिर्क किया, अल्लाह के लिए शरीक या औलाद ठहराई, या उसके रसूलों और अहकाम को झुठलाया, यह सब अल्लाह पर झूठ बाँधना है।

[149] क़ियामत में काफ़िरों के स्याह चेहरे

महशर में काफ़िरों और मुशरिकों के चेहरे स्याह और बदरंग होंगे जिससे दूर ही से उनकी रुसवाई और शक़ावत पहचानी जाएगी। इसके बरअक्स मोमिनीन के चेहरे नूरानी और रोशन होंगे। गुनाहगार मोमिनों के चेहरे काले नहीं किए जाएंगे क्योंकि अल्लाह अपने महबूब ﷺ की उम्मत को ऐसी रुसवाई से महफ़ूज़ रखेगा।

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