कुरान - 39:61 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
وَيُنَجِّي ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ بِمَفَازَتِهِمۡ لَا يَمَسُّهُمُ ٱلسُّوٓءُ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ

Transliteration: (Wa yunajjil laahul lazee nat taqaw bimafaazatihim laa yamassuhumus sooo'u wa laa hum yahzanoon)

और अल्लाह परहेज़गारों को उनकी कामयाबी (जन्नत) की जगह में नजात बख़्शेगा [150], न उन्हें कोई तकलीफ़ पहुँचेगी और न वे ग़मगीन होंगे [151] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 61

"और अल्लाह परहेज़गारों को उनकी कामयाबी (जन्नत) की जगह में नजात बख़्शेगा [150], न उन्हें कोई तकलीफ़ पहुँचेगी और न वे ग़मगीन होंगे [151] ।"

[150] मुत्तक़ियों की कामियाबी और मक़ाम-ए-जन्नत

अल्लाह तआला अपने नेक और परहेज़गार बंदों को महशर की होलनाक आफ़तों और दोज़ख़ के अज़ाब से बचाकर जन्नत की अज़ीम नेमतों में पहुँचा देगा जो हमेशा की नजात और कामयाबी का मक़ाम है।

[151] जन्नत में ग़म व ख़ौफ़ का न होना

जन्नत में अहले ईमान को न कोई जिस्मानी तकलीफ़ होगी और न ही कोई रंज व ग़म। दुनियावी तअल्लुक़ात और फ़िक्रमंदियां ख़त्म हो जाएंगी और हर तरफ़ शादमानी, अमन और रूहानी सुरूर का राज होगा।

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