कुरान - 39:63 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
لَّهُۥ مَقَالِيدُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

Transliteration: (Lahoo maqaaleedus sa maawaati wal ard; wallazeena kafaroo bi ayaatil laahi ulaaa'ika humul khaasiroon (section 6))

उसी के पास आसमानों और ज़मीन की कुंजियाँ हैं [154], और जिन्होंने अल्लाह की आयतों का इनकार किया वही लोग घाटे में रहने वाले हैं [155] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 63

"उसी के पास आसमानों और ज़मीन की कुंजियाँ हैं [154], और जिन्होंने अल्लाह की आयतों का इनकार किया वही लोग घाटे में रहने वाले हैं [155] ।"

[154] मक़ालीद—आसमान व ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियाँ

आसमान व ज़मीन के तमाम ख़ज़ानों—रिज़्क़, रहमत, बारिश और फ़ज़्ल—की कुंजियाँ अल्लाह के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं। मुफ़स्सिरीन और अहले मारफ़त बयान फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने इन ख़ज़ानों की कुंजियाँ अपने हबीब पाक हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के दस्त-ए-अक़दस में अता फ़रमाई हैं, जैसा कि हदीस शरीफ़ में है: "मुझे ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियाँ अता की गईं।"

[155] आयतों के मुनकिरों का ख़सारा

जो लोग इन रोशन दलाइल और क़ुरआनी आयतों का इनकार करते हैं, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में मुकम्मल नुक़सान और ख़सारे में हैं क्योंकि उन्होंने रहमत-ए-इलाही का दरवाज़ा अपने ऊपर बंद कर लिया।

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