कुरान - 39:65 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
وَلَقَدۡ أُوحِيَ إِلَيۡكَ وَإِلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكَ لَئِنۡ أَشۡرَكۡتَ لَيَحۡبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ

Transliteration: (Wa laqad oohiya ilaika wa ilal lazeena min qablika la in ashrakta la yahbatanna 'amalu ka wa latakoonanna minal khaasireen)

और बेशक आपकी तरफ़ और आपसे पहले वालों की तरफ़ भी यही वह्य भेजी गई कि (ऐ सुनने वाले!) अगर तूने शिर्क किया तो यक़ीनन तेरा सब अमल ज़ाया हो जाएगा और तू ज़रूर नुक़सान उठाने वालों में रहेगा [158] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 65

"और बेशक आपकी तरफ़ और आपसे पहले वालों की तरफ़ भी यही वह्य भेजी गई कि (ऐ सुनने वाले!) अगर तूने शिर्क किया तो यक़ीनन तेरा सब अमल ज़ाया हो जाएगा और तू ज़रूर नुक़सान उठाने वालों में रहेगा [158] ।"

[158] शिर्क की हलाकत-आफ़रीनी

ख़िताब बजाहिर हुज़ूर ﷺ को है मगर मुराद उम्मत और सुनने वाले हैं (ताअरीज़ का अंदाज़)। अंबिया-ए-किराम का शिर्क करना मुहाल-ए-अक़्ली व शरई है। इसका मक़सद शिर्क की शनाअत और बुराई को इस तरह वाज़ेह करना है कि अगर बिलफ़र्ज़ कोई मुक़र्रब तरीन हस्ती भी शिर्क करती तो उसके आमाल भी अकारथ हो जाते; तो आम इंसान की क्या बिसात! शिर्क तमाम नेक आमाल को जलाकर ख़ाक कर देता है।

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