कुरान - 39:64 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
قُلۡ أَفَغَيۡرَ ٱللَّهِ تَأۡمُرُوٓنِّيٓ أَعۡبُدُ أَيُّهَا ٱلۡجَٰهِلُونَ

Transliteration: (Qul afaghairal laahi taamurooonneee a'budu ayyuhal jaahiloon)

आप फ़रमाइए: 'ऐ जाहिलो [156]! क्या तुम मुझे यह हुक्म देते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करूँ [157]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 64

"आप फ़रमाइए: 'ऐ जाहिलो [156]! क्या तुम मुझे यह हुक्म देते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करूँ [157]?'"

[156] मुशरिकों की जिहालत

कुफ़्फ़ार-ए-मक्का ने हुज़ूर ﷺ से पेशकश की थी कि कुछ अरसा आप हमारे बुतों की पूजा करें और कुछ अरसा हम आपके ख़ुदा की इबादत करेंगे। अल्लाह ने उनकी इस हिमाक़त को सख़्ती से मुस्तरद फ़रमाया और उन्हें 'जाहिल' क़रार दिया जो तौहीद की हक़ीक़त से बिल्कुल बेख़बर थे।

[157] इबादत सिर्फ़ अल्लाह के लिए मख़सूस

इबादत सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला ही का हक़ है। इसमें किसी नबी, वली या फ़रिश्ते की शिर्कत मुमकिन नहीं। अंबिया-ए-किराम मासूम होते हैं, उनके हक़ में शिर्क का तसव्वुर भी मुहाल है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now