कुरान - 39:66 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
بَلِ ٱللَّهَ فَٱعۡبُدۡ وَكُن مِّنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ

Transliteration: (Balil laahha fa'bud wa kum minash shaakireen)

बल्कि अल्लाह ही की इबादत कीजिए और शुक्रगुज़ारों में से रहिए [159] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 66

"बल्कि अल्लाह ही की इबादत कीजिए और शुक्रगुज़ारों में से रहिए [159] ।"

[159] इबादत और शुक्रगुज़ारी

ख़ालिस अल्लाह तआला की इबादत में लगे रहना ही बंदगी का असल मक़सद है। उसकी बेपनाह नेमतों और तौफ़ीक़-ए-ईमान पर हर वक़्त ज़बान और दिल से उसका शुक्र अदा करते रहना मुक़र्रबीन का शेवा है।

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