कुरान - 39:67 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
وَمَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦ وَٱلۡأَرۡضُ جَمِيعٗا قَبۡضَتُهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُ مَطۡوِيَّـٰتُۢ بِيَمِينِهِۦۚ سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Wa maa qadarul laaha haqqa qadrihee wal ardu jamee 'an qabdatuhoo Yawmal Qiyaamati wassamaawaatu matwiyyaatum biyameenih; Subhaanahoo wa Ta'aalaa 'amma yushrikoon)

और उन्होंने अल्लाह की जैसी क़द्र करनी चाहिए थी वैसी क़द्र न की [160], और सारी ज़मीन क़ियामत के दिन उसकी मुट्ठी में होगी [161], और आसमान उसके दस्ते-क़ुदरत में लपेटे हुए होंगे; वह पाक और बहुत बुलंद है उस शिर्क से जो वे करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 67

"और उन्होंने अल्लाह की जैसी क़द्र करनी चाहिए थी वैसी क़द्र न की [160], और सारी ज़मीन क़ियामत के दिन उसकी मुट्ठी में होगी [161], और आसमान उसके दस्ते-क़ुदरत में लपेटे हुए होंगे; वह पाक और बहुत बुलंद है उस शिर्क से जो वे करते हैं।"

[160] अल्लाह की अज़मत की नाक़द्री

मुशरिकों ने बेजान और बेबस पत्थरों को अल्लाह का शरीक बनाकर अल्लाह तआला की बेमिसाल अज़मत व किब्रियाई की नाक़द्री की। जिसने उसके रसूल ﷺ की अज़मत न पहचानी, उसने अल्लाह की अज़मत को भी न जाना।

[161] क़ियामत के दिन जलाल-ए-इलाही

'क़ब्ज़ा' और 'दस्ते-रास्त' से मुराद अल्लाह तआला की कामिल क़ुदरत, ग़लबा और सल्तनत है। सारी ज़मीन और सातों आसमान उसकी अज़ीम क़ुदरत के सामने ऐसे सिमट जाएंगे जैसे हाथ में कोई छोटी सी चीज़। उस दिन अल्लाह तआला फ़रमाएगा: 'मैं ही शहंशाह हूँ, कहाँ हैं ज़मीन के बादशाह?' वह हर ऐब और शिर्क से पाक और बुलंदतरीन है।

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