कुरान - 39:59 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
بَلَىٰ قَدۡ جَآءَتۡكَ ءَايَٰتِي فَكَذَّبۡتَ بِهَا وَٱسۡتَكۡبَرۡتَ وَكُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Balaa qad jaaa'atka aayaatee fa kazzabta bihaa wa stakbarta wa kunta minal kaafireen)

हाँ क्यों नहीं! बेशक तेरे पास मेरी निशानियां (आयतों व दलाइल) पहुँची थीं [146], तो तूने उन्हें झुठलाया और तकब्बुर किया, और तू काफ़िरों में से था [147] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 59

"हाँ क्यों नहीं! बेशक तेरे पास मेरी निशानियां (आयतों व दलाइल) पहुँची थीं [146], तो तूने उन्हें झुठलाया और तकब्बुर किया, और तू काफ़िरों में से था [147] ।"

[146] हुज्जत का तमाम होना

अल्लाह तआला की तरफ़ से उसके इस झूठे उज़्र का जवाब दिया जाएगा कि मेरी निशानियां, क़ुरआन की आयतें और मेरे रसूल ﷺ के मोजिज़ात तेरे पास पहुँचे थे। हिदायत में कोई कमी न थी, बल्कि तूने ख़ुद हक़ को ठुकराया।

[147] तकब्बुर और कुफ़्र का अंजाम

उसका इनकार किसी शुबहे की वजह से नहीं बल्कि घमंड और सरकशी की वजह से था। उसने जानबूझकर कुफ़्र का रास्ता चुना, इसलिए अब उसका कोई उज़्र क़बूल नहीं होगा।

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