कुरान - 39:57 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
أَوۡ تَقُولَ لَوۡ أَنَّ ٱللَّهَ هَدَىٰنِي لَكُنتُ مِنَ ٱلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Aw taqoola law annal laaha hadaanee lakuntu minal muttaqeen)

या यह न कहे: 'अगर अल्लाह मुझे हिदायत देता [144], तो मैं ज़रूर परहेज़गारों में से होता' । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 57

"या यह न कहे: 'अगर अल्लाह मुझे हिदायत देता [144], तो मैं ज़रूर परहेज़गारों में से होता' ।"

[144] मुनकिर का झूठा बहाना

काफ़िर क़ियामत में तक़दीर का झूठा बहाना बनाएगा कि अगर अल्लाह ने मुझे हिदायत दी होती तो मैं भी नेक बन जाता। यह महज़ हीला-हवाला है क्योंकि अल्लाह ने अक़्ल दी, अंबिया भेजे, किताबें उतारीं और सही-ग़लत का रास्ता पूरी तरह वाज़ेह फ़रमा दिया था।

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