Transliteration: (Wa mā yastawī al-aʿmā wa al-baṣīr)
"और अंधा और देखने वाला बराबर नहीं हो सकते [64];"
यह आयत एक वाज़ेह तमसील पेश करती है कि जिस तरह नाबीना (अंधा) और बीना (आंखों वाला) कभी बराबर नहीं हो सकते, उसी तरह:
नूर और तारीकी, हिदायत और गुमराही का यह फ़र्क़ अक़्ल और शरीअत दोनों में अटल है।
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