कुरान - 35:19 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَمَا يَسۡتَوِي ٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡبَصِيرُ

Transliteration: (Wa mā yastawī al-aʿmā wa al-baṣīr)

और अंधा और देखने वाला बराबर नहीं हो सकते [64]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 19

"और अंधा और देखने वाला बराबर नहीं हो सकते [64];"

[64] हक़ व बातिल, आलिम व जाहिल और मोमिन व काफ़िर का फ़र्क़

यह आयत एक वाज़ेह तमसील पेश करती है कि जिस तरह नाबीना (अंधा) और बीना (आंखों वाला) कभी बराबर नहीं हो सकते, उसी तरह:

  • मोमिन और काफ़िर कभी बराबर नहीं हो सकते।
  • आलिम और जाहिल का मर्तबा एक जैसा नहीं हो सकता।
  • हुज़ूर ﷺ की ताज़ीम व मदह करने वाला और आपकी शान में गुस्ताख़ी करने वाला बराबर नहीं हो सकते।

नूर और तारीकी, हिदायत और गुमराही का यह फ़र्क़ अक़्ल और शरीअत दोनों में अटल है।

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