Transliteration: (Wa laz zillu wa lal haroor)
"और न साया और तेज़ धूप [66];"
साया और तेज़ धूप की मिसाल से कई हक़ीक़तें रौशन होती हैं:
इसी तरह अंबिया-ए-किराम और आम इंसान कभी बराबर नहीं हो सकते; अंबिया की ज़ात बशर होने के बावजूद तमाम मख़्लूक़ से आला व अरफ़ा है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat