कुरान - 35:21 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَلَا ٱلظِّلُّ وَلَا ٱلۡحَرُورُ

Transliteration: (Wa laz zillu wa lal haroor)

और न साया और तेज़ धूप [66]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 21

"और न साया और तेज़ धूप [66];"

[66] जन्नत व दोज़ख़ और नबी व ग़ैर-नबी का अज़ीम फ़र्क़

साया और तेज़ धूप की मिसाल से कई हक़ीक़तें रौशन होती हैं:

  • जन्नत की ठंडी रहमत भरी छांव और जहन्नुम की दहकती आग व धूप कभी एक जैसी नहीं हो सकतीं।
  • राहत और अज़ाब बराबर नहीं हो सकते।
  • हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक सोहबत व क़ुर्बत और आपकी बरकतों से महरूमी में ज़मीन व आसमान का फ़र्क़ है।

इसी तरह अंबिया-ए-किराम और आम इंसान कभी बराबर नहीं हो सकते; अंबिया की ज़ात बशर होने के बावजूद तमाम मख़्लूक़ से आला व अरफ़ा है।

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