Transliteration: (In anta illaa nazeer)
"आप तो बस एक डराने वाले हैं [70]!"
इस आयत में हुज़ूर ﷺ की बुनियादी ज़िम्मेदारी का ज़िक्र है कि आपका काम सिर्फ़ हक़ का पैग़ाम पहुँचाना और नाफ़रमानों को अंजामे बद से डराना है। ज़बरदस्ती ईमान में दाख़िल करना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है।
इसका यह मतलब हरगिज़ नहीं कि हुज़ूर ﷺ में इसके अलावा और कोई सिफ़त नहीं; आप तो रहमतुल लिल आलमीन, शाफ़िए मुज़्निबीन, सिराजुम मुनीर और अनगिनत कमालत के मालिक हैं। आप पर काफ़िरों के कुफ़्र का कोई वबाल नहीं होगा जैसा कि फ़रमाया: "आपसे दोज़ख़ वालों के बारे में सवाल नहीं किया जाएगा" (सूरह बक़रह)।
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