कुरान - 35:24 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
إِنَّآ أَرۡسَلۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ بَشِيرٗا وَنَذِيرٗاۚ وَإِن مِّنۡ أُمَّةٍ إِلَّا خَلَا فِيهَا نَذِيرٞ

Transliteration: (Innaa arsalnaaka bil haqqi basheeranw wa nazeeraa; wa im min ummatin illaa khalaa feehaa nazeer)

बेशक हमने आपको हक़ के साथ ख़ुशख़बरी देने वाला [71] और डराने वाला बनाकर भेजा है; और कोई उम्मत ऐसी नहीं गुज़री जिसमें कोई डराने वाला न आया हो [72]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 24

"बेशक हमने आपको हक़ के साथ ख़ुशख़बरी देने वाला [71] और डराने वाला बनाकर भेजा है; और कोई उम्मत ऐसी नहीं गुज़री जिसमें कोई डराने वाला न आया हो [72]!"

[71] बशीर व नज़ीर — रिसालत का मक़सद

हुज़ूर अकरम ﷺ को हक़ और कामिल सच्चाई के साथ भेजा गया है ताकि आप फ़रमांबरदारों को जन्नत और रज़ा-ए-इलाही की बशारत (ख़ुशख़बरी) दें और नाफ़रमानों को अज़ाबे इलाही से डराएं।

[72] हर उम्मत में हिदायत और डराने वाले की आमद

अल्लाह तआला का यह अज़ीम क़ानून रहा है कि उसने हर दौर और हर क़ौम की हिदायत के लिए पैग़ंबर, रसूल, सहीफ़े या अंबिया के वारिस (उलमा व मुबल्लिग़ीन) भेजे ताकि लोगों पर हुज्जत तमाम हो जाए और कोई यह न कह सके कि हमें कोई ख़बरदार करने वाला नहीं आया था। बुख़ारी शरीफ़ में है कि तमाम अंबिया आला और शरीफ़ ख़ानदानों में पैदा फ़रमाए गए।

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