Transliteration: (Summa akhaztul lazeena kafaroo fakaifa kaana nakeer (section 3))
"फिर मैंने काफ़िरों को पकड़ लिया, तो मेरा अज़ाब कैसा हुआ [76]!"
जब मुतकब्बिर काफ़िरों ने रसूलों को झुठलाने में हद कर दी, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर टूट पड़ा — किसी पर चीख़, किसी पर तूफ़ान, किसी पर पत्थरों की बारिश और किसी को ज़मीन में धंसा दिया गया। यह तंबीह है कि अल्लाह के रसूलों की तकज़ीब का अंजाम हमेशा हलाकत और बरबादी है।
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