कुरान - 35:27 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجۡنَا بِهِۦ ثَمَرَٰتٖ مُّخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهَاۚ وَمِنَ ٱلۡجِبَالِ جُدَدُۢ بِيضٞ وَحُمۡرٞ مُّخۡتَلِفٌ أَلۡوَٰنُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٞ

Transliteration: (Alam tara annal laaha anzala minas samaaa’i maaa’an fa akhrajnaa bihee samaraatim mukhtalifan alwaanuhaa; wa minal jibaali judadum beedunw wa humrum mukhtalifun alwaanuhaa wa gharaabeebu sood)

क्या आपने नहीं देखा [77] कि अल्लाह ने आसमान से पानी उतारा, फिर हमने उसके ज़रिये मुख़्तलिफ़ रंगों के फल निकाले [78]? और पहाड़ों में भी सफ़ेद और सुर्ख़ टुकड़े हैं जिनके रंग मुख़्तलिफ़ हैं और कुछ निहायत काले हैं [79]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 27

"क्या आपने नहीं देखा [77] कि अल्लाह ने आसमान से पानी उतारा, फिर हमने उसके ज़रिये मुख़्तलिफ़ रंगों के फल निकाले [78]? और पहाड़ों में भी सफ़ेद और सुर्ख़ टुकड़े हैं जिनके रंग मुख़्तलिफ़ हैं और कुछ निहायत काले हैं [79]!"

[77] कुदरते इलाही के मुशाहिदे की दावत

इंसानी बसीरत को दावत दी जा रही है कि कुदरत के इन हैरतअंगेज़ नज़ारों पर ग़ौर करे कि पानी का रंग और ज़ायका एक जैसा है, मगर उससे पैदा होने वाली नबातात की क़िस्में अनगिनत हैं।

[78] एक ही पानी से मुख़्तलिफ़ रंगों और ज़ायकों के फल

एक ही ज़मीन और एक ही बारिश के पानी से अल्लाह तआला ज़र्द, सुर्ख़, सब्ज़, काले और तरह-तरह के रंगों व ज़ायकों के फल पैदा फ़रमाता है। यह इस बात का खुला सुबूत है कि यह सब ख़ुद-ब-ख़ुद नहीं हुआ बल्कि एक हकीम व क़ादिर ख़ालिक़ की सनअत का करिश्मा है।

[79] पहाड़ों की रंग-बिरंगी चट्टानें और कुदरते कामिला

पहाड़ों में कुदरती तौर पर सफ़ेद, सुर्ख़ और गहरे काले रंग की पट्टियां (रास्ते व चट्टानें) पाई जाती हैं। बे-जान पत्थरों में यह रंग-बिरंगा हुस्न अल्लाह तआला की बे-मिसाल कारीगरी का मुंह बोलता सुबूत है।

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