कुरान - 35:25 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدۡ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَبِٱلزُّبُرِ وَبِٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُنِيرِ

Transliteration: (Wa iny yukazzibooka faqad kazzabal lazeena min qablihim jaaa’at hum Rusuluhum bilbaiyinaati wa biz Zuburi wa bil Kitaabil Muneer)

और अगर ये आपको झुठलाएं, तो बेशक इनसे पहले वाले लोग भी झुठला चुके हैं [73]; उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ (मौजिज़ात) [74], सहीफ़े और रौशन किताब लेकर आए थे [75]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 25

"और अगर ये आपको झुठलाएं, तो बेशक इनसे पहले वाले लोग भी झुठला चुके हैं [73]; उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ [74], सहीफ़े और रौशन किताब लेकर आए थे [75];"

[73] तकज़ीब पर महबूब ﷺ की तसल्ली

अल्लाह तआला अपने महबूब ﷺ को तसल्ली बख़्शते हुए फ़रमाता है कि अगर मक्का के मुशरिक़ीन आपकी तकज़ीब करते हैं तो ग़म न फ़रमाएं; पिछली क़ौमों (क़ौमे आद, समूद, क़ौमे लूत आदि) ने भी अपने पैग़ंबरों को झुठलाया था। महबूब की दिलजोई फ़रमाना रब्बे करीम की सुन्नत है।

[74] वाज़ेह निशानियाँ और अंबिया के मौजिज़ात

'बय्यिनात' से मुराद वे अज़ीम मौजिज़ात और दलाइल हैं जो अल्लाह ने पिछले रसूलों को अता फ़रमाए थे, जिनसे उनकी नबुव्वत का हक़ होना सूरज की तरह रौशन था।

[75] गुज़श्ता अंबिया की किताबें और क़ुरआने हकीम का दायमी मौजिज़ा

हज़रत शीष, इद्रीस और इब्राहीम अलैहिमुस्सलाम पर सहीफ़े (ज़ुबुर) नाज़िल हुए, और हज़रत मूसा, दाऊद व ईसा अलैहिमुस्सलाम को आसमानी किताबें अता हुईं। पिछले अंबिया की किताबें ख़ुद मौजिज़ा नहीं थीं बल्कि उनके मौजिज़ात जुदा थे; लेकिन क़ुरआने करीम हमारे प्यारे नबी ﷺ का वह अज़ीम मौजिज़ा है जो किताब भी है और क़यामत तक ज़िंदा मौजिज़ा भी।

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