कुरान - 35:20 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَلَا ٱلظُّلُمَٰتُ وَلَا ٱلنُّورُ

Transliteration: (Wa laz zulumaatu wa lan noor)

और न अंधेरे और रौशनी [65]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 20

"और न अंधेरे और रौशनी [65];"

[65] कुफ़्र की तारीकियां और इस्लाम का वाहिद नूर

यहाँ अंधेरे (ज़ुलुमात) से मुराद कुफ़्र व बातिल के रास्ते हैं और रौशनी (नूर) से मुराद इस्लाम व ईमान की हिदायत है।

  • क़ुरआन मजीद में 'ज़ुलुमात' (अंधेरे) जमा (प्लुरल) के सीग़े में आया है, क्योंकि कुफ़्र, गुमराही और शिर्क की अनगिनत शाख़ें और तरीक़े हैं।
  • जबकि 'नूर' (रौशनी) वाहिद (सिंगुलर) आया है, क्योंकि हक़ और सच्चाई का रास्ता सिर्फ़ एक ही है — और वह इस्लाम और सुन्नत का रास्ता है।

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