कुरान - 35:30 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
لِيُوَفِّيَهُمۡ أُجُورَهُمۡ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضۡلِهِۦٓۚ إِنَّهُۥ غَفُورٞ شَكُورٞ

Transliteration: (Liyuwaffiyahum ujoorahum wa yazeedahum min fadlih; innahoo Ghafoorun Shakoor)

ताकि वह उन्हें उनके पूरे अज्र अता फ़रमाए [88] और अपने फ़ज़्ल से उन्हें और ज़्यादा दे; बेशक वह बहुत बख़्शने वाला, बड़ा क़द्रदान है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 30

"ताकि वह उन्हें उनके पूरे अज्र अता फ़रमाए [88] और अपने फ़ज़्ल से उन्हें और ज़्यादा दे; बेशक वह बहुत बख़्शने वाला, बड़ा क़द्रदान है।"

[88] कामिल अज्र, अता-ए-इलाही और दीदारे इलाही की नेमत

अल्लाह तआला हर नेक अमल का पूरा सवाब अता फ़रमाएगा — दस गुना, सत्तर गुना, सात सौ गुना या उससे भी बे-हिसाब। और 'अपने फ़ज़्ल से और ज़्यादा दे' से मुराद जन्नत में दीदारे इलाही की बे-मिसाल नेमत है, जो सिर्फ़ अल्लाह के फ़ज़्ल व करम से नसीब होगी, आमाल के बदले में नहीं। वह बंदों की थोड़ी सी इबादत की भी बड़ी क़द्र फ़रमाने वाला (शकूर) है।

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