कुरान - 35:34 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِيٓ أَذۡهَبَ عَنَّا ٱلۡحَزَنَۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٞ شَكُورٌ

Transliteration: (Wa qaalul hamdu lillaahil lazeee azhaba ‘annal hazan; inna Rabbanaa la Ghafoorun Shakoor)

और वे कहेंगे, "तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमसे ग़म दूर कर दिया [96]; बेशक हमारा रब बहुत बख़्शने वाला, बड़ा क़द्रदान है [97];" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 34

"और वे कहेंगे: 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमसे ग़म दूर कर दिया [96]; बेशक हमारा रब बहुत बख़्शने वाला, बड़ा क़द्रदान है [97]।'"

[96] दायमी नजात और तमाम ग़मों का ख़ात्मा

जन्नत में दाख़िल होने के बाद अहले ईमान कहेंगे कि अल्लाह ने दुनियावी रंज, मौत की सख़्ती, क़ब्र की वहशत, हश्र की हौलनाकी और गुनाहों के अज़ाब का तमाम ग़म हमेशा के लिए दूर फ़रमा दिया। जन्नत में कोई तकलीफ़ या मशक़्क़त नहीं होगी, मगर अल्लाह की हम्द और हुज़ूर ﷺ पर दुरूद व सलाम का सिलसिला जन्नत में भी जारी रहेगा।

[97] जन्नत सिर्फ़ फ़ज़ले इलाही से मिलेगी

जन्नत में दाख़िला बंदे के अपने आमाल का मुआवज़ा नहीं बल्कि अल्लाह तआला का ख़ालिस फ़ज़्ल और मग्फ़िरत है। वह ग़फ़ूर है जिसने गुनाह माफ़ फ़रमाए, और शकूर है जिसने थोड़ी सी इबादत की भी इतनी अज़ीम क़द्र फ़रमाई।

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