Transliteration: (Allazeee ahallanaa daaral muqaamati min fadlihee laa yamassunaa feehaa nasabunw wa laa yamassunaa feehaa lughoob)
"जिसने हमें अपने फ़ज़्ल से [98] हमेशा रहने के घर में ठहराया, जहाँ न हमें कोई मशक़्क़त पहुंचती है [99] और न वहाँ हमें कोई थकावट आती है।"
इस आयत से साफ़ मालूम हुआ कि जन्नत की हमेशा की बादशाही सिर्फ़ अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम से मिलती है, किसी को अपने आमाल पर घमंड नहीं करना चाहिए। जन्नत की तमाम नेमतें और लज़्ज़तें रब का फ़ज़्ल हैं।
जन्नत में न कोई बीमारी होगी, न बुढ़ापा, न मौत, न रंजो-ग़म और न नफ़्सानी ख़्वाहिशात का फ़साद। इंसान हर तरह की जिस्मानी और रूहानी तकलीफ़ व थकावट से महफ़ूज़ रहेगा।
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