कुरान - 35:35 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
ٱلَّذِيٓ أَحَلَّنَا دَارَ ٱلۡمُقَامَةِ مِن فَضۡلِهِۦ لَا يَمَسُّنَا فِيهَا نَصَبٞ وَلَا يَمَسُّنَا فِيهَا لُغُوبٞ

Transliteration: (Allazeee ahallanaa daaral muqaamati min fadlihee laa yamassunaa feehaa nasabunw wa laa yamassunaa feehaa lughoob)

"जिसने हमें अपने फ़ज़्ल से [98] हमेशा रहने के घर में ठहराया, जहाँ न हमें कोई मशक़्क़त (तक्लीफ़) पहुंचती है [99] और न वहाँ हमें कोई थकावट आती है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 35

"जिसने हमें अपने फ़ज़्ल से [98] हमेशा रहने के घर में ठहराया, जहाँ न हमें कोई मशक़्क़त पहुंचती है [99] और न वहाँ हमें कोई थकावट आती है।"

[98] जन्नत में दाख़िला ख़ालिस फ़ज़ले इलाही है

इस आयत से साफ़ मालूम हुआ कि जन्नत की हमेशा की बादशाही सिर्फ़ अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम से मिलती है, किसी को अपने आमाल पर घमंड नहीं करना चाहिए। जन्नत की तमाम नेमतें और लज़्ज़तें रब का फ़ज़्ल हैं।

[99] हर रंज, बीमारी और तक्लीफ़ से मुकम्मल अमान

जन्नत में न कोई बीमारी होगी, न बुढ़ापा, न मौत, न रंजो-ग़म और न नफ़्सानी ख़्वाहिशात का फ़साद। इंसान हर तरह की जिस्मानी और रूहानी तकलीफ़ व थकावट से महफ़ूज़ रहेगा।

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