Transliteration: (Innal laaha yumsikus samaawaati wal arda an tazoolaaa; wa la’in zaalataaa in amsa kahumaa min ahadim mim ba’dih; innahoo kaana Haleeman Ghafooraa)
"बेशक अल्लाह ही आसमानों और ज़मीन को थामे हुए है ताकि वे टल न जाएं [120]; और अगर वे टल जाएं तो उसके बाद कोई ऐसा नहीं जो उन्हें थाम सके [121]; बेशक वह बड़ा बुर्दबार, बहुत बख़्शने वाला है [122]!"
इस आयत से साबित होता है कि आसमान और ज़मीन अपनी जगह क़ायम और साकिन हैं; गर्दिश सिर्फ़ सूरज, चाँद और सितारों में रखी गई है, जैसा कि फ़रमाया: "और हर एक एक दायरे में तैर रहा है" (सूरह यासीन)। क़दीम फ़लसफ़ा जो आसमान की हरकत का क़ायल था और जदीद नज़रिया जो ज़मीन की गर्दिश का दावा करता है, क़ुरआन के ज़ाहिर से टकराते हैं।
अगर अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत का सहारा हटा ले, तो सारी कायनात पलक झपकते ही तबाह हो जाए। कोई फ़रिश्ता या मख़्लूक़ इसे थामने की ताक़त नहीं रखती।
काफ़िरों के शिर्क, कुफ़्र और नाफ़रमानियों के बावजूद अल्लाह तआला आसमानों और ज़मीन के निज़ाम को बरक़रार रखता है और उन पर फ़ौरन अज़ाब नहीं भेजता। यह उसकी बुर्दबारी (हिल्म) और मग्फ़िरत की खुली अलामत है।
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