Transliteration: (Tanzeelum Minar-Rahmaanir-Raheem)
(यह किताब) नाज़िल की हà¥à¤ˆ है [2] निहायत मेहरबान, बेहद रहम फ़रमाने वाले की तरफ़ से।
इस आयत-à¤-करीमा से दो अहम हक़ीक़तें वाज़ेह होती हैं:
1. क़à¥à¤°à¤†à¤¨ करीम का तदरीजी नà¥à¤œà¤¼à¥‚ल: क़à¥à¤°à¤†à¤¨ मजीद लोह-à¤-महफ़ूज़ से आसमान-à¤-दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पर à¤à¤• बार नाज़िल हà¥à¤†, फिर वहां से रसूले अकरम सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® के क़लà¥à¤¬-à¤-अतहर पर तेईस (23) साल के अरसे में हालात और ज़रूरतों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ आहिसà¥à¤¤à¤¾-आहिसà¥à¤¤à¤¾ नाज़िल फ़रमाया गया ताकि मोमिनों के दिलों को तसà¥à¤•ीन हासिल हो और अहकाम को समà¤à¤¨à¤¾ और उन पर अमल करना आसान हो।
2. रहमत व शफ़क़त का मà¥à¤œà¤¸à¥à¤¸à¤®à¤¾: क़à¥à¤°à¤†à¤¨ करीम अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की रहमत और सिफ़ात-à¤-जमालिया का कामिल मज़हर है। इसीलिठयहां 'रहमान' और 'रहीम' का ज़िकà¥à¤° फ़रमाया गया कि यह किताब बंदों पर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की बेपायां रहमत, शफ़क़त और लà¥à¤¤à¥à¤«à¤¼ व करम की दलील है।
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