कुरान - 41:2 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
تَنزِيلٞ مِّنَ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Transliteration: (Tanzeelum Minar-Rahmaanir-Raheem)

(यह किताब) नाज़िल की हुई है [2] निहायत मेहरबान, बेहद रहम फ़रमाने वाले की तरफ़ से। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 2

(यह किताब) नाज़िल की हुई है [2] निहायत मेहरबान, बेहद रहम फ़रमाने वाले की तरफ़ से।

[2] क़ुरआन करीम का नुज़ूल और सिफ़ात-ए-इलाही का मज़हर

इस आयत-ए-करीमा से दो अहम हक़ीक़तें वाज़ेह होती हैं:

1. क़ुरआन करीम का तदरीजी नुज़ूल: क़ुरआन मजीद लोह-ए-महफ़ूज़ से आसमान-ए-दुनिया पर एक बार नाज़िल हुआ, फिर वहां से रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ल्ब-ए-अतहर पर तेईस (23) साल के अरसे में हालात और ज़रूरतों के मुताबिक़ आहिस्ता-आहिस्ता नाज़िल फ़रमाया गया ताकि मोमिनों के दिलों को तस्कीन हासिल हो और अहकाम को समझना और उन पर अमल करना आसान हो।

2. रहमत व शफ़क़त का मुजस्समा: क़ुरआन करीम अल्लाह तआला की रहमत और सिफ़ात-ए-जमालिया का कामिल मज़हर है। इसीलिए यहां 'रहमान' और 'रहीम' का ज़िक्र फ़रमाया गया कि यह किताब बंदों पर अल्लाह तआला की बेपायां रहमत, शफ़क़त और लुत्फ़ व करम की दलील है।

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