Transliteration: (Kitaabun fussilat Aayaatuhoo Qur-aanan 'Arabiyyal liqawminy ya'lamoon)
à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ किताब जिसकी आयतें ख़ूब खोल-खोल कर बयान की गई हैं [3], अरबी ज़बान का क़à¥à¤°à¤†à¤¨, उन लोगों के लिठजो समठरखते हैं।
इस आयत में क़à¥à¤°à¤†à¤¨ मजीद की मà¥à¤¨à¤«à¤¼à¤°à¤¿à¤¦ शान बयान की गई है कि इसकी आयतें हर à¤à¤¤à¤¬à¤¾à¤° से मà¥à¤«à¤¼à¤¸à¥à¤¸à¤² और वाज़ेह हैं:
1. मआनी व मफ़ाहिम की वज़ाहत: इसमें अहकाम, हलाल व हराम, मिसालें, वादे और वईदें (चेतावनी) इंतिहाई फ़साहत व बलाग़त के साथ खोल-खोल कर बयान की गई हैं ताकि अक़à¥à¤² व क़लà¥à¤¬ दोनों मà¥à¤¤à¤¾à¤¸à¥à¤¸à¤¿à¤° हों।
2. सिफ़ात-à¤-इलाही और अक़ाइद का बयान: तौहीद, रिसालत और आख़िरत के दलाइल को इतने रौशन अंदाज़ में पेश किया गया है कि समà¤à¤¨à¥‡ वालों के लिठहक़ को क़बूल करना आसान हो जाà¤à¥¤ अरबी ज़बान अपनी वà¥à¤¸à¤…त और गहराई की वजह से इस कलाम के नà¥à¤œà¤¼à¥‚ल के लिठमà¥à¤‚तख़ब फ़रमाई गई।
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