कुरान - 41:3 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
كِتَٰبٞ فُصِّلَتۡ ءَايَٰتُهُۥ قُرۡءَانًا عَرَبِيّٗا لِّقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Kitaabun fussilat Aayaatuhoo Qur-aanan 'Arabiyyal liqawminy ya'lamoon)

एक ऐसी किताब जिसकी आयतें ख़ूब खोल-खोल कर बयान की गई हैं [3], अरबी ज़बान का क़ुरआन, उन लोगों के लिए जो समझ रखते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 3

एक ऐसी किताब जिसकी आयतें ख़ूब खोल-खोल कर बयान की गई हैं [3], अरबी ज़बान का क़ुरआन, उन लोगों के लिए जो समझ रखते हैं।

[3] क़ुरआनी आयतों की फ़साहत, बलाग़त और तफ़सील

इस आयत में क़ुरआन मजीद की मुनफ़रिद शान बयान की गई है कि इसकी आयतें हर एतबार से मुफ़स्सल और वाज़ेह हैं:

1. मआनी व मफ़ाहिम की वज़ाहत: इसमें अहकाम, हलाल व हराम, मिसालें, वादे और वईदें (चेतावनी) इंतिहाई फ़साहत व बलाग़त के साथ खोल-खोल कर बयान की गई हैं ताकि अक़्ल व क़ल्ब दोनों मुतास्सिर हों।

2. सिफ़ात-ए-इलाही और अक़ाइद का बयान: तौहीद, रिसालत और आख़िरत के दलाइल को इतने रौशन अंदाज़ में पेश किया गया है कि समझने वालों के लिए हक़ को क़बूल करना आसान हो जाए। अरबी ज़बान अपनी वुसअत और गहराई की वजह से इस कलाम के नुज़ूल के लिए मुंतख़ब फ़रमाई गई।

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