कुरान - 41:5 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
وَقَالُواْ قُلُوبُنَا فِيٓ أَكِنَّةٖ مِّمَّا تَدۡعُونَآ إِلَيۡهِ وَفِيٓ ءَاذَانِنَا وَقۡرٞ وَمِنۢ بَيۡنِنَا وَبَيۡنِكَ حِجَابٞ فَٱعۡمَلۡ إِنَّنَا عَٰمِلُونَ

Transliteration: (Wa qaaloo quloobunaa feee akinnatim mimmaa tad'oonaaa ilaihi wa feee aazaaninaa waqrunw wa mim baininaa wa bainika hijaabun fa'mal innanaa 'aamiloon)

और वे कहते हैं: हमारे दिल उन बातों से पर्दों में हैं जिनकी तरफ़ आप हमें बुलाते हैं [6], और हमारे कानों में भारीपन है, और हमारे और आपके दरमियान एक पर्दा (रुकावट) है [7]; पस आप (अपनी जगह) अमल कीजिए, हम भी (अपनी जगह) अमल करने वाले हैं [8]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 5

और वे कहते हैं: हमारे दिल उन बातों से पर्दों में हैं जिनकी तरफ़ आप हमें बुलाते हैं [6], और हमारे कानों में भारीपन है, और हमारे और आपके दरमियान एक पर्दा (रुकावट) है [7]; पस आप (अपनी जगह) अमल कीजिए, हम भी (अपनी जगह) अमल करने वाले हैं [8]!

[6] तकब्बुर और हठधर्मी का मुज़ाहिरा

कुफ़्फ़ार-ए-मक्का ने यह बात इंतिहाई घमंड और मज़ाक़ उड़ाते हुए कही कि आपके वाज़ व नसीहत का हमारे दिलों पर कोई असर नहीं हो सकता। गुमराही के दौर में इंसान अपनी रूहानी महरूमी और अंधेपन को अपनी बहादुरी और फ़ख़्र समझ बैठता है, जैसा कि आज भी बाज़ बेदीन लोग नमाज़ व रोज़े का मज़ाक़ उड़ाते हैं और अपनी बेअमली पर इतराते हैं।

[7] हक़ बात को सरकशी के तौर पर बोलना

अगरचे उनके दिलों पर हिदायत से महरूमी का पर्दा था, लेकिन इस बात को उन्होंने एतराफ़-ए-जुर्म के तौर पर नहीं बल्कि सरकशी और इनाद के तौर पर कहा। इब्लीस ने भी कहा था कि तूने मुझे गुमराह किया, मगर तकब्बुर के साथ कहा तो हमेशा के लिए मरदूद हो गया; इसके बरअक्स हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने 'रब्बना ज़लम्ना अन्फ़ुसना' आजीज़ी और तौबा के साथ अर्ज़ किया तो मग़फ़िरत व कुर्ब हासिल हुआ।

[8] मुकम्मल मुख़ालिफ़त और दुश्मनी का एलान

उनका यह कहना कि "आप अपना काम कीजिए, हम अपना काम करते हैं" सरासर मुख़ालिफ़त और धमकी थी कि आप अपने दीन की तब्लीग़ कीजिए और हम आपको नुक़सान पहुंचाने और दीन को मिटाने की पूरी कोशिश करेंगे।

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