कुरान - 40:31 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
مِثۡلَ دَأۡبِ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَٱلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡۚ وَمَا ٱللَّهُ يُرِيدُ ظُلۡمٗا لِّلۡعِبَادِ

Transliteration: (Misla daabi qawmi Noohinw wa 'aadinw wa Samooda wallazeena mim ba'dihim; wa mal laahu yureedu zulmal lil'ibaad)

'जैसी क़ौम-ए-नूह [81], और समूद और जो उनके बाद हुए [82] उन पर पड़ी थी; और अल्लाह बंदों पर कोई ज़ुल्म नहीं चाहता [83] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 31

"'जैसी क़ौम-ए-नूह [81], और समूद और जो उनके बाद हुए [82] उन पर पड़ी थी; और अल्लाह बंदों पर कोई ज़ुल्म नहीं चाहता [83] ।'"

[81] पिछली तबाहशुदा क़ौमों की तारीख़ से सबक़

हज़रत मोमिन-ए-आल-ए-फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को नूह, समूद और आद जैसी क़ौमों की हलाकत याद दिलाई जो अपनी सरकशी और रसूलों की नाफ़रमानी की वजह से सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा दी गईं। अहले मिस्र इन वाक़िआत से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे।

[82] बा'द की हलाकशुदा क़ौमें

'जो उनके बाद हुए' से मुराद क़ौम-ए-लूत और क़ौम-ए-शुऐब वग़ैरह हैं जिन्होंने अपने अंबिया को झुठलाया और उन पर पत्थरों व आग का अज़ाब नाज़िल हुआ।

[83] अल्लाह का अदल-ए-कामिल

अल्लाह तआला अपने बंदों पर कभी ज़ुल्म नहीं फ़रमाता। वह पहले हिदायत के लिए रसूल और रोशन दलाइल भेजता है, फिर जो लोग जानबूझकर हठधर्मी और सरकशी पर अड़े रहते हैं, सिर्फ़ उन्हीं पर अज़ाब नाज़िल फ़रमाता है। फ़िरऔन का ज़ुल्म व जाबिरियत झूठी ख़ुदाई की दलील थी, जबकि सच्चा ख़ुदा सरापा अदल व रहमत है।

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