कुरान - 40:32 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَيَٰقَوۡمِ إِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ يَوۡمَ ٱلتَّنَادِ

Transliteration: (Wa yaa qawmi inneee akhaafu 'alaikum yawmat tanaad)

'और ऐ मेरी क़ौम! मुझे तुम पर चीख़-पुकार और फ़रियाद के दिन (क़ियामत) का ख़ौफ़ है [84] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 32

"'और ऐ मेरी क़ौम! मुझे तुम पर चीख़-पुकार और फ़रियाद के दिन (क़ियामत) का ख़ौफ़ है [84] ।'"

[84] यौमुत-तनाद—फ़रियाद व पुकार का दिन

क़ियामत के दिन को 'यौमुत-तनाद' (आपस में पुकारने और चीख़ने का दिन) फ़रमाया गया, क्योंकि उस दिन:

  • दोज़ख़ी जन्नतियों को पानी और नेमतों के लिए पुकारेंगे।
  • लोग अपनी जान छुड़ाने के लिए एक-दूसरे से मदद मांगेंगे मगर कोई काम न आएगा।
  • फ़रिश्ते हिसाब के लिए हर इंसान को नाम लेकर पुकारेंगे।
  • मौत को मेंढे की शक्ल में लाकर ज़िबह किया जाएगा और पुकारा जाएगा: 'ऐ जन्नत वालो! अब हमेशा की ज़िंदगी है, और ऐ दोज़ख़ वालो! अब कभी मौत नहीं आएगी।'

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