Transliteration: (Wa anis taghfiroo Rabbakum summa toobooo ilaihi yumatti'kum mataa'an hasanan ilaaa ajalim musammanw wa yu'ti kulla zee fadlin fadlahoo wa in tawallaw fa inneee akhaafu 'alaikum 'azaaba Yawmin Kabeer)
तौबा का मतलब है गुज़रे हुए गुनाहों पर माफ़ी मांगना और आइंदा उन्हें न करने का पुख़्ता अहद करना। बाज़ औक़ात दोनों आमाल एक ही मानी में इस्तेमाल होते हैं। इस आयत से मालूम होता है कि दुनियावी मुसीबतों को इस्तिग़फ़ार और तौबा के ज़रिए टाला जा सकता है, और इनके ज़रिए क़नाअत और आसानी हासिल होती है। अल्लाह तआला का फ़रमान है: "और मैंने कहा कि अपने रब से माफ़ी मांगो, बेशक वह बड़ा बख़्शने वाला है" (सूरह नूह 71:10)।
इससे मुराद यह है कि ईमान वालों को उनके आमाल के मुताबिक़ या उनके तक़्वे की बरकत से दर्जात अता किए जाएंगे। अल्लाह तआला हमें आइंदा और ज़्यादा परहेज़गारी की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
इससे मालूम होता है कि नबी करीम ﷺ को अपनी ज़ात या अपने सच्चे जांनिसारों के लिए अज़ाब का ख़ौफ़ नहीं है, क्योंकि शबे मेअराज में उनके मक़ाम व मर्तबे को आप पर ज़ाहिर कर दिया गया था। लेकिन नबी करीम ﷺ के दिल में अल्लाह तआला का बहुत बड़ा ख़ौफ़ व अज़मत है, और यह ख़ौफ़ ईमान का एक अज़ीम सुतून है।
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