कुरान - 14:3 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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ٱلَّذِينَ يَسۡتَحِبُّونَ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا عَلَى ٱلۡأٓخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبۡغُونَهَا عِوَجًاۚ أُوْلَـٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلِۭ بَعِيدٖ

Transliteration: (Allazeena yastahibboo nal hayaatad dunyaa 'alal aakhirati wa yasuddoona 'ansabeelil laahi wa yabghoonahaa 'iwajaa; ulaaa 'ika fee dalaalin ba'eed)

जो लोग आख़िरत के मुक़ाबले में सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हैं और अल्लाह के रास्ते से (दूसरों को) रोकते हैं और उसमें टेढ़ापन तलाश करते हैं—यही लोग परले दर्जे की गुमराही (भटकाव) में पड़े हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 3 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दुनिया-परस्ती और दीन की राह में रुकावट

काफ़िरों का मुख्य रोग यह था कि उन्होंने आख़िरत को भुलाकर दुनियावी फ़ायदे को सब कुछ समझ लिया था। वे न केवल ख़ुद ईमान से भागे, बल्कि दूसरों को भी अल्लाह की राह से रोकने और इस्लाम में कमियां व ऐब निकालने की साज़िशें करते रहे।

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