कुरान - 14:4 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوۡمِهِۦ لِيُبَيِّنَ لَهُمۡۖ فَيُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Wa maaa arsalnaa mir Rasoolin illaa bilisaani qawmihee liyubaiyina lahum fa yudillul laahu mai yashaaa'u wa yahdee mai yashaaa'; wa Huwal 'Azeezul Hakeem)

और हमने कोई रसूल नहीं भेजा मगर उसकी अपनी क़ौम की भाषा में, ताकि वह उनके सामने (सत्य को) भली-भांति स्पष्ट कर दे। फिर अल्लाह जिसे चाहता है भटका देता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है; और वही बड़ा प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 4 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अपनी क़ौम की भाषा में पैग़म्बरों का भेजा जाना

अल्लाह की यह हिकमत रही कि हर नबी को उसकी क़ौम की मातृभाषा में भेजा गया ताकि लोग संदेश को आसानी से समझ सकें और हुज्जत पूरी हो जाए। रसूलुल्लाह ﷺ को अरबी भाषा बोलने वाली क़ौम में भेजा गया ताकि अरब इसे समझकर पूरी दुनिया तक पहुंचाएं।

✅ [2] हिदायत अल्लाह की मर्जी और हिकमत से

स्पष्ट समझाने के बाद भी हिदायत उसी को मिलती है जो सच्चाई का तलबगार हो, और जो हठधर्मी करे अल्लाह उसे उसी के हाल पर छोड़ देता है।

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