Transliteration: (Wa maaa arsalnaa mir Rasoolin illaa bilisaani qawmihee liyubaiyina lahum fa yudillul laahu mai yashaaa'u wa yahdee mai yashaaa'; wa Huwal 'Azeezul Hakeem)
अल्लाह की यह हिकमत रही कि हर नबी को उसकी क़ौम की मातृभाषा में भेजा गया ताकि लोग संदेश को आसानी से समझ सकें और हुज्जत पूरी हो जाए। रसूलुल्लाह ﷺ को अरबी भाषा बोलने वाली क़ौम में भेजा गया ताकि अरब इसे समझकर पूरी दुनिया तक पहुंचाएं।
स्पष्ट समझाने के बाद भी हिदायत उसी को मिलती है जो सच्चाई का तलबगार हो, और जो हठधर्मी करे अल्लाह उसे उसी के हाल पर छोड़ देता है।
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