कुरान - 14:43 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
مُهۡطِعِينَ مُقۡنِعِي رُءُوسِهِمۡ لَا يَرۡتَدُّ إِلَيۡهِمۡ طَرۡفُهُمۡۖ وَأَفۡـِٔدَتُهُمۡ هَوَآءٞ

Transliteration: (Muhti'eena muqni'ee ru'oosihim laa yartaddu ilaihim tarfuhum wa af'idatuhum hawaaa')

वे अपने सिर ऊपर उठाए भागे चले आ रहे होंगे, उनकी पलकें स्वयं अपनी ओर भी न झपक सकेंगी और उनके दिल (दहशत के मारे) शून्य (उड़े हुए) होंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 43 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हश्र के मैदान में अपराधियों की बदहवासी

क़यामत के दिन ज़ालिम बेतहाशा दौड़े चले आएंगे, डर के मारे उनकी नज़रें एक जगह जम जाएंगी और वे अपनी पलक भी नहीं झपका पाएंगे। ख़ौफ़ की शिद्दत से उनके दिल हलक़ तक आ पहुंचेंगे और अक़्ल व होश काम नहीं करेंगे।

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