कुरान - 14:44 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَأَنذِرِ ٱلنَّاسَ يَوۡمَ يَأۡتِيهِمُ ٱلۡعَذَابُ فَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ رَبَّنَآ أَخِّرۡنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٖ قَرِيبٖ نُّجِبۡ دَعۡوَتَكَ وَنَتَّبِعِ ٱلرُّسُلَۗ أَوَلَمۡ تَكُونُوٓاْ أَقۡسَمۡتُم مِّن قَبۡلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٖ

Transliteration: (Wa anzirin naasa Yawma yaateehimul 'azaabu fa yaqoolul lazeena zalamoo Rabbanaaa akhkhirnaaa ilaaa ajalin qareebin nujib da'wataka wa nattabi 'ir Rusul; awalam takoonooo aqsamtum min qablu maa lakum min zawaal)

और लोगों को उस दिन से सचेत कर दीजिए जिस दिन उन पर अज़ाब आ पहुंचेगा, तो ज़ालिम लोग कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमें थोड़ी सी अवधि तक की मोहलत दे दे ताकि हम तेरे बुलावे को स्वीकार कर लें और रसूलों का अनुसरण कर लें!" (उनसे कहा जाएगा) "क्या तुम वही नहीं हो जिन्होंने इससे पहले क़समें खाई थीं कि तुम्हारा कभी पतन नहीं होना है?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 44 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अज़ाब देखकर व्यर्थ पश्चाताप

अज़ाब सामने देखकर मुजरिम गिड़गिड़ाएंगे कि हमें ज़रा-सी मोहलत मिल जाए ताकि हम नबियों की बात मान लें। मगर जवाब मिलेगा कि अब मोहलत का वक़्त ख़त्म हो चुका, दुनिया में तो तुम क़समें खाते थे कि हमें कभी मरना और हिसाब नहीं देना है।

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