कुरान - 31:16 सूरह लुक़मान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
يَٰبُنَيَّ إِنَّهَآ إِن تَكُ مِثۡقَالَ حَبَّةٖ مِّنۡ خَرۡدَلٖ فَتَكُن فِي صَخۡرَةٍ أَوۡ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ أَوۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ يَأۡتِ بِهَا ٱللَّهُۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٞ

Transliteration: (Ya bunaiya innahaaa in taku misqaala habbatim min khardalin fatakun fee sakhratin aw fis samaawaati aw fil ardi yaati bi Allah; innal laaha lateefun Khabeer)

(लुक़मान ने कहा) 'ऐ मेरे प्यारे बेटे! बेशक अगर कोई चीज़ राई के दाने के बराबर भी हो [33], फिर वह किसी चट्टान के अंदर हो या आसमानों में हो या ज़मीन में, अल्लाह उसे (हिसाब के लिए) ले आएगा [34]; बेशक अल्लाह बारीक-बीन, पूरी ख़बर रखने वाला है [35]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह लुक़मान आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह लुक़मान तफ़सीर - आयत 16

"(लुक़मान ने कहा) 'ऐ मेरे प्यारे बेटे! बेशक अगर कोई चीज़ राई के दाने के बराबर भी हो [33], फिर वह किसी चट्टान के अंदर हो या आसमानों में हो या ज़मीन में, अल्लाह उसे (हिसाब के लिए) ले आएगा [34]; बेशक अल्लाह बारीक-बीन, पूरी ख़बर रखने वाला है [35]।"

[33] छोटे से छोटे अमल का मुहासिबा

हज़रत लुक़मान की नसीहत का यह हिस्सा इलाही इंसाफ़ की बे-मिसाल बारीकी को बयान करता है। राई का दाना एक इंतिहाई छोटी और मामूली चीज़ की अलामत है, लेकिन अल्लाह का इल्म और इंसाफ़ उस पर भी मुहीत है। कोई भी अमल—नेक हो या बद—इतना छोटा नहीं कि उसकी नज़र से ओझल रह सके। यह सिखाता है कि हर अमल का हिसाब होगा, चाहे वह कितना ही छुपा हुआ या मामूली क्यों न दिखाई दे।

[34] अल्लाह से कोई चीज़ पोशीदा नहीं

चाहे कोई अमल किसी सख़्त चट्टान के अंदर छुपा हो, या आसमानों की वुसअतों में खोया हुआ हो, अल्लाह उसे ज़रूर सामने ले आएगा। यह इलाही मुहासिबे के यक़ीनी होने को साबित करता है। यह दिल में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा और ज़िम्मेदारी का अहसास जगाता है कि कोई भी चीज़ अल्लाह की क़ुदरत से बाहर नहीं, चाहे वह ज़मीन की गहराइयों में हो या कायनात की बुलंदियों में।

यह मोमिन को तालीम देता है कि वह अपने आमाल के बारे में हमेशा होशियार रहे, यह जानते हुए कि उसकी तन्हाई और पोशीदा नीयतें भी अल्लाह के इल्म में हैं।

[35] अल्लाह का लतीफ़ और ख़बीर होना

आयत का इख़्तिताम अल्लाह के दो मुबारका नामों पर होता है:

  • अल-लतीफ़ (बारीक-बीन): अल्लाह इंतिहाई बारीक और नाज़ुक मुआम्लात से बा-ख़बर है—वह सिर्फ़ ज़ाहिरी अमल को नहीं बल्कि हर अमल के पीछे छुपी नीयत को भी जानता है।

  • अल-ख़बीर (पूरी ख़बर रखने वाला): उसका इल्म मुकम्मल और हर चीज़ को घेरे हुए है, जो तमाम जहानों और हक़ाइक़ तक फैला हुआ है।

ये दोनों अस्मा-ए-हुस्ना याद दिलाते हैं कि अल्लाह न सिर्फ़ सब कुछ देखता है बल्कि आमाल के हर पहलू और मक़सद को ख़ूब समझता है। यह आयत मोमिन के ज़मीर और अख़लाक़ी अहसास की बुनियाद है कि कोई भी चीज़ अल्लाह के इल्म और मुहासिबे से बच नहीं सकती।

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