कुरान - 47:11 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ مَوۡلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَأَنَّ ٱلۡكَٰفِرِينَ لَا مَوۡلَىٰ لَهُمۡ

Transliteration: (Zaalika bi annal laaha mawlal lazeena aamanoo wa annal kaafireena laa mawlaa lahum (section 1))

यह इसलिए कि अल्लाह ईमान वालों का मददगार व मौला है, और काफ़िरों का कोई मौला (मददगार) नहीं [26]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 11

"यह इसलिए कि अल्लाह ईमान वालों का मददगार व मौला है, और काफ़िरों का कोई मौला (मददगार) नहीं [26]।"


[26] मोमिनों का सच्चा मौला और काफ़िरों की बेबसी

लफ़्ज़ 'मौला' का अर्थ है संरक्षक, कारसाज़, मददगार और दोस्त।

  • मोमिनों के हक़ में: अल्लाह तआला ईमान वालों का मौला है। वह दुनिया में उनकी मदद फ़रमाता है, आज़माइशों में सब्र व राहत देता है, और आख़िरत में अपने फ़ज़ल व करम से बख़्शिश और जन्नत अता फ़रमाता है।
  • काफ़िरों के हक़ में: काफ़िरों का कोई सच्चा मौला व कारसाज़ नहीं। उनके झूठे माबूद, उनके सरदार, दौलत या लश्कर—कोई भी उन्हें अल्लाह की पकड़ और जहन्नम के अज़ाब से नहीं बचा सकता। जब मुसीबत आती है तो सब साथ छोड़ देते हैं।

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