कुरान - 47:12 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
إِنَّ ٱللَّهَ يُدۡخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يَتَمَتَّعُونَ وَيَأۡكُلُونَ كَمَا تَأۡكُلُ ٱلۡأَنۡعَٰمُ وَٱلنَّارُ مَثۡوٗى لَّهُمۡ

Transliteration: (Innal-laaha yudkhilul lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru wallazeena kafaroo yatamatta'oona wa ya'kuloona kamaa ta'kulul an'aamu wan Naaru maswan lahum)

बेशक अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए [27], उन बाग़ों में दाख़िल फ़रमाएगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं [28], जबकि काफ़िर दुनिया के फ़ायदे उठाते हैं [29] और ऐसे खाते हैं जैसे चौपाए (जानवर) खाते हैं [30], और आग ही उनका ठिकाना है [31]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 12

"बेशक अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए [27], उन बाग़ों में दाख़िल फ़रमाएगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं [28], जबकि काफ़िर दुनिया के फ़ायदे उठाते हैं [29] और ऐसे खाते हैं जैसे चौपाए (जानवर) खाते हैं [30], और आग ही उनका ठिकाना है [31]।"


[27] ईमान के साथ नेक आमाल की अहमियत

अल्लाह तआला ने जन्नत की नेमतों का वादा उन लोगों से फ़रमाया है जिन्होंने ईमान के साथ-साथ नेक आमाल किए। नेक आमाल ईमान का हुस्न और उसकी ताज़गी हैं।


[28] जन्नत के बाग़ और नहरें

मोमिनों के लिए ऐसी जन्नतें तैयार हैं जिनके महलों और दरख़्तों के नीचे दूध, शहद, पाकीज़ा पानी और शरबत की सदाबहार नहरें रवानी के साथ बह रही हैं।


[29] काफ़िरों का दुनिया में अस्थायी उपभोग

काफ़िर दुनिया की फ़ानी लज़्ज़तों में इस तरह मग्न हैं कि उन्हें मौत और आख़िरत की कोई फ़िक्र नहीं। उनकी यह राहत चंद दिनों की है जिसके बाद हमेशा का अज़ाब है।


[30] चौपायों (जानवरों) की तरह खाना — खाने के चार दर्जे

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि खाने के चार तरीक़े हैं:

  1. फ़रिश्तों की तरह: जो खाते-पीते नहीं, बल्कि अल्लाह की ज़िक्र व तस्बीह ही उनकी ग़िज़ा है।
  2. जानवरों की तरह: जो हलाल-हराम, पाक-नापाक की कोई परवाह किए बिना सिर्फ़ पेट भरने और नफ़्स की लज़्ज़त के लिए खाते हैं। काफ़िरों का खाना इसी श्रेणी में आता है।
  3. आज़ाद मोमिनों की तरह: जो हलाल रिज़्क़ खाते हैं, अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं और इबादत की ताक़त हासिल करने की नीयत से खाते हैं।
  4. क़ैदियों की तरह: जैसे गुनाहगार इंसान ख़ौफ़ और शर्मिंदगी के साथ खाता है।

[31] जहन्नम की आग का ठिकाना

काफ़िरों का अंतिम और स्थायी ठिकाना जहन्नम की दहकती हुई आग है, जहाँ से उन्हें कभी रिहाई नहीं मिलेगी।

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