Transliteration: (Innal-laaha yudkhilul lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru wallazeena kafaroo yatamatta'oona wa ya'kuloona kamaa ta'kulul an'aamu wan Naaru maswan lahum)
"बेशक अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए [27], उन बाग़ों में दाख़िल फ़रमाएगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं [28], जबकि काफ़िर दुनिया के फ़ायदे उठाते हैं [29] और ऐसे खाते हैं जैसे चौपाए (जानवर) खाते हैं [30], और आग ही उनका ठिकाना है [31]।"
अल्लाह तआला ने जन्नत की नेमतों का वादा उन लोगों से फ़रमाया है जिन्होंने ईमान के साथ-साथ नेक आमाल किए। नेक आमाल ईमान का हुस्न और उसकी ताज़गी हैं।
मोमिनों के लिए ऐसी जन्नतें तैयार हैं जिनके महलों और दरख़्तों के नीचे दूध, शहद, पाकीज़ा पानी और शरबत की सदाबहार नहरें रवानी के साथ बह रही हैं।
काफ़िर दुनिया की फ़ानी लज़्ज़तों में इस तरह मग्न हैं कि उन्हें मौत और आख़िरत की कोई फ़िक्र नहीं। उनकी यह राहत चंद दिनों की है जिसके बाद हमेशा का अज़ाब है।
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि खाने के चार तरीक़े हैं:
काफ़िरों का अंतिम और स्थायी ठिकाना जहन्नम की दहकती हुई आग है, जहाँ से उन्हें कभी रिहाई नहीं मिलेगी।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat