Transliteration: (Afaman kaana 'alaa baiyinatim mir Rabbihee kaman zuyyina lahoo sooo'u 'amalihee wattaba'ooo ahwaaa'ahum)
"तो क्या वह जो अपने रब की तरफ़ से रौशन दलील पर हो [33], उन जैसा हो सकता है जिनके लिए उनके बुरे आमाल ख़ुशनुमा बना दिए गए हों और वे अपनी ख़्वाहिशात के पीछे चल रहे हों [34]?"
यहाँ 'रौशन दलील' (बय्यिना) से मुराद वह हक़ीक़ी यक़ीन, बसारत और कुरआन व सुन्नत का नूर है जो अल्लाह तआला सच्चे मोमिनों और ख़ास तौर पर हुज़ूर ﷺ और आपके सहाबा को अता फ़रमाता है। वे हर क़दम इल्म और इलाही रहनुमाई की रौशनी में उठाते हैं।
इसके मुक़ाबले काफ़िर और मुशरिक हैं जिनकी मति ऐसी मारी गई है कि शैतान ने उनके गुनाहों, ज़ुल्म और शिर्क को उनकी नज़रों में अच्छा बनाकर दिखा दिया है। वे किसी अक़्ल या दलील के नहीं, बल्कि अपनी अंधी नफ़्सानी ख़्वाहिशात के ग़ुलाम हैं। दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।
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