कुरान - 47:14 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّهِۦ كَمَن زُيِّنَ لَهُۥ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ وَٱتَّبَعُوٓاْ أَهۡوَآءَهُم

Transliteration: (Afaman kaana 'alaa baiyinatim mir Rabbihee kaman zuyyina lahoo sooo'u 'amalihee wattaba'ooo ahwaaa'ahum)

तो क्या वह जो अपने रब की तरफ़ से रौशन दलील पर हो [33], उन जैसा हो सकता है जिनके लिए उनके बुरे आमाल ख़ुशनुमा बना दिए गए हों और वे अपनी ख़्वाहिशात के पीछे चल रहे हों [34]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 14

"तो क्या वह जो अपने रब की तरफ़ से रौशन दलील पर हो [33], उन जैसा हो सकता है जिनके लिए उनके बुरे आमाल ख़ुशनुमा बना दिए गए हों और वे अपनी ख़्वाहिशात के पीछे चल रहे हों [34]?"


[33] रौशन दलील (बय्यिना) पर क़ायम मोमिन

यहाँ 'रौशन दलील' (बय्यिना) से मुराद वह हक़ीक़ी यक़ीन, बसारत और कुरआन व सुन्नत का नूर है जो अल्लाह तआला सच्चे मोमिनों और ख़ास तौर पर हुज़ूर ﷺ और आपके सहाबा को अता फ़रमाता है। वे हर क़दम इल्म और इलाही रहनुमाई की रौशनी में उठाते हैं।


[34] बुरे आमाल को अच्छा समझना और नफ़्स की पैरवी

इसके मुक़ाबले काफ़िर और मुशरिक हैं जिनकी मति ऐसी मारी गई है कि शैतान ने उनके गुनाहों, ज़ुल्म और शिर्क को उनकी नज़रों में अच्छा बनाकर दिखा दिया है। वे किसी अक़्ल या दलील के नहीं, बल्कि अपनी अंधी नफ़्सानी ख़्वाहिशात के ग़ुलाम हैं। दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।

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